Prabhasakshi Special |MRI | आरसीईपी में क्यों नहीं शामिल हुआ भारत | Why India quit RCEP |Trade Deal

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डील के मुताबिक आरईसीपी अगले 20 सालों में कई तरह के सामानों पर टैरिफ खत्म करेगा। इम्पोर्ट एक्सपोर्ट ड्यूटीज हटाई जाएंगी। इसमें बौद्धिक संपदा, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएं, ई कामर्स और व्यवसायिक सेवाएं भी शामिल होंगी। मोटा-माटी कहे तो ये डील फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का एक विस्तृत स्वरूप मानी जा सकती है। आरसीईपी के कई सदस्य देशों में पहले से ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए हैं। जो लोग भारत के आरसीईपी में शामिल होने के समर्थक हैं, वो ये विचार रखते हैं कि भारत को इस में शामिल होने से फ़ायदा होगा. क्योंकि आज अमेरिका के टीटीपी से अलग होने की वजह से भारत को कोई मुनाफ़ा नहीं हो रहा है। ऐसे में आरसीईपी की मदद से विश्व व्यापार का एक वैकल्पि ढांचा खड़ा होगा। इसका विश्व की सामरिक राजनीतिक व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। भारत के आरसीईपी से अलग होने के बाद, आरसीईपी की चमक धूमिल हो गई है। आरसीईपी का मुख्य लक्ष्य भारत के विशाल बाज़ार तक पहुंच बनाने का था। बाक़ी दुनिया के लिए भारत की 1.4 अरब की आबादी एक बड़ा बाज़ार है, जिसके नागरिकों की आमदनी पिछले कई वर्षों से 6 से 8 फ़ीसद की दर से बढ़ रही है।