Barack Obama ने सोनिया गांधी को चालाक और राहुल गांधी को नासमझ क्यों कहा

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डॉ. मनमोहन सिंह सचमुच एक्सीडेंटल प्रधानमंत्री ही थे यह बात उनके पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू या भाजपा के नेता ही नहीं कहते बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी कहा है कि डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी काबिलियत की वजह से नहीं, बल्कि राहुल गांधी के पोलिटिकल कैरियर को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री बनाया गया। सोनिया गांधी जानती थीं कि मनमोहन सिंह का कोई राजनीतिक आधार नहीं है और वह कभी राहुल गांधी के लिए खतरा नहीं बन सकते इसलिए मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद पर बैठाया गया था। दस साल तक ऐसे व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद पर बैठाये रखा गया जो संजय बारू के मुताबिक हर निर्णय के लिए दस जनपथ की ओर ताकते थे। दरअसल 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद जब प्रधानमंत्री पद की राह में सोनिया गांधी का विदेशी मूल का मुद्दा रोड़े की तरह आ गया तो गांधी परिवार ने सोनिया गांधी को त्याग की मूर्ति की तरह पेश करते हुए सरदार मनमोहन सिंह का नाम प्रधानमंत्री के रूप में आगे कर दिया, जबकि कांग्रेस में उस समय प्रणब मुखर्जी जैसे कद्दावर नेता मौजूद थे, जिनकी अपनी अलग शख्सियत थी। प्रणब को कांग्रेस का 'चाणक्य' माना जाता था, उनकी राजनैतिक सूझबूझ गजब की थी, लेकिन दस जनपथ को पीएम की कुर्सी के लिये एक ऐसा नेता चाहिए था, जो देश से अधिक गांधी परिवार के लिए वफादार हो। गांधी परिवार की सोच के इस फ्रेम में मनमोहन सिंह बिल्कुल फिट बैठते थे। इसीलिये मनमोहन सिंह की प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ताजपोशी को एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर कहा जाने लगा। 2004 के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी। इस बार लग रहा था कि राहुल गांधी की प्रधानमंत्री के रूप में ताजपोशी हो जाएगी, लेकिन ऐसा दो कारणों से नहीं हो सका। एक तो राहुल गांधी की अपरिपक्वता और दूसरा सोनिया गांधी को पर्दे के पीछे से सरकार चलाना ठीक लग रहा था क्योंकि छवि उनकी नहीं मनमोहन सिंह की दागदार हो रही थी, इसीलिए वह इस व्यवस्था को जारी रखना चाहती थीं।