7 प्रकार के होते हैं प्रदोष व्रत, जानें किस प्रदोष से क्या फल मिलता है, पूजा एवं उद्यापन विधि

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प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती से जुड़ा है। ऐसी मान्यता है कि जो भी इस व्रत को रखता है और विधि विधान से पूजा अर्चना करता है भोलेनाथ और देवी पार्वती की कृपा उस पर बनी रहती है। प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को ये व्रत रखा जाता है। सूर्यास्त के बाद और रात्रि आने से पहले के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। पौराणिक कथाओं में इस बात का वर्णन किया गया है कि त्रयोदशी के दिन देवी पार्वती और महादेव अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं। जिस तरह ये व्रत अति कल्याणकारी है ठीक उसी तरफ अलग अलग दिन पड़ने वाले इस व्रत की महिमा भी अलग है। आइए विस्तार से इस व्रत के बारे जानते हैं।

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